केन्द्र में एक जनवरी 2004 से व राज्यों में अलग-अलग तारीख़ से :
NPS =New Pension Scheme
इसमे नई पेंशन योजना के लागू होने की तिथि के बाद जो सरकारी सेवा मे आये है वो कर्मचारी आते है ....इसमे 10% (बेसिक +डी०ए०)कर्मचारी का और उसमे 10% सरकार अपनी तरफ से जोड कर 33%+33%+34% तीन अलग अलग स्कीम में लाती है .....पर असल बात ये है .....कि कर्मचारी 10 साल से पहले इसमे से कुछ भी नही निकाल सकता , 10 साल बाद केवल 25% जितना भी उस समय तक जमा होगा निकाल सकता है वो भी तीन प्रयोजन के लिए .... विवाह , मकान , बीमारी , इसमे केवल बीमारी की अवस्था मे वो बार बार 25%ले सकता है बाकी दो में 5 वर्ष कि अन्तर होना चाहिए ,
रिटायरमेन्ट पर कर्मचारी को 40% ही दिया जाएगा बाकी 60% से पैन्शन दी जाएगी , अगर कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो परिवार को केवल 20% दिया जाएगा और 80% से पैन्शन दी जाएगी ,
अगर परिवार मे केवल पति पत्नी ही है तो सोचो पति के रिटायर होने पर 40% या मृत्यु होने पर 20% उसके बाद पत्नी भी दो चार साल में मृत्यु को प्राप्त है जाती है तो बाकी का पैसा किसी को नही मिलेगा ........अब इसमें 50% तो हमारा ही है उसमे से 10% पर NSDL ने कब्जा कर लिया .....इस पर विचार करों ये बहुत गलत स्कीम है सरकार पर दबाव बनाओ और इसमे उचित बदलाव लाओ ........ नीति निर्धारण करने वाले खुद इतने बड़े पदों पर होते हैं कि वे इतना कमा चुके होते हैं कि उनके खर्च इतने अधिक होते हैं कि उनकी तनख्वाह से तो उनके बिजली के बिल पूरे हो जाएँ तो बड़ी बात है। वे ऐसे मकानों में रहते हैं कि जहाँ प्लाट की जमीन की कीमत ही 20-30 करोड़ हो सकती है। उनके बच्चे उन संस्थाओं में पढ़े होते हैं जहाँ साल भर की फीस ही 3 से 10 लाख तक हो सकती है या इससे अधिक भी। फिर उन्हें पेंशन से क्या लेना? नेता तो उनके भी ऊपर वाले पाट होते हैं।
वक्त आ गया है कि इन नीति निर्धारकों की सम्पत्ति लूटने का, इन्हें सड़क पर घसीट-घसीट कर मारने का। इनके घरों में तो कुत्तों को भी Air conditioner मिलता है और हमें पूरी जिन्दगी काटने पर बुढ़ापे में पेंशन भी नहीं मिलती।
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