नई पेंशन स्कीम को हाईकोर्ट में चुनौती, याचिका में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की मांग
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dainikbhaskar | Nov 04,2016 7:14 PM IST
इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने केन्द्र व राज्य कर्मचारियों की नई पेंशन स्कीम की वैधता की चुनौती याचिका पर केन्द्र व राज्य सरकार से 6 सप्ताह में जवाब मांगा है। याची का कहना है कि सांसदों व विधायकों को एक दिन भी सदन का सदस्य बनते ही 20 हजार प्रतिमाह पेंशन निर्धारित है। वहीँ सरकारी कर्मचारियों को लम्बी सेवा के बावजूद अंशदायी पेंशन की अनिवार्य व्यवस्था की गई है। यह अनुच्छेद 14 व 21 के विपरीत है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस.एन.शुक्ला ने प्राइमरी स्कूल जोखल इलाहाबाद के सहायक अध्यापक विवेकानंद की याचिका पर दिया है। याचिका में नई पेंशन स्कीम को रद्द करने तथा पुरानी पेंशन स्कीम फिर से लागू करने की मांग की गई है। याची का कहना है कि अंशदायी पेंशन की नई योजना, एलआईसी योजना की तरह निवेश पर निर्भर करेगी। इस योजना के तहत 60 साल में रिटायर्ड होने से पहले यदि कुलराशि का 40 प्रतिशत जमा है तो 60 प्रतिशत पेंशन मिलेगी।
वहीँ 80 फीसदी जमा करने पर ही पूरी पेंशन दी जाएगी। इस योजना में कर्मचारी बीमा कंपनी में पेंशन पाएगा। इसमें कोई इंक्रीमेंट नहीं जुड़ेगा, जबकि पुरानी पेंशन योजना में समय-समय पर डियरनेस एलाउन्स जुड़ता जाता था। केन्द्र सरकार ने 1जनवरी 2004 से तथा राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2005 से नई पेंशन योजना लागू की है। भारतीय सेना में पुरानी पेंशन योजना ही लागू है। शेयर बाजार की तरह निश्चित पेंशन मिलने की कोई गारंटी नहीं है। यह केन्द्र व राज्य कर्मचारियों के साथ अन्याय है। सरकार को ऐसी नीति बनाने का अधिकार नहीं है, जो नागरिकों के बीच भेदभाव करती हो और मूल अधिकारों के खिलाफ हो। याचिका की सुनवाई 8 सप्ताह बाद होगी।
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